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चैत्र नवरात्रि 2025 की शुरुआत दिनाँक 30 मार्च, रविवार से हो चुकी है। पंचांग के अनुसार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष को प्रारंभ हो चूका है।
इस दौरान भक्तगण माँ दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक की पूजा करते हैं। पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती का पाठ और सुबह-शाम आरती की जाती है। अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन और हवन का आयोजन होता है, जिसमें नौ कन्याओं को भोजन कराया जाता है।
चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन रामनवमी के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान श्रीराम के जन्म का पावन पर्व है। इस दिन भक्तजन श्रीराम की विशेष पूजा करते हैं, रामायण पाठ, भजन और कीर्तन का आयोजन करते हैं और प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।
रामनवमी पर श्रीराम जन्मोत्सव की झांकियां निकाली जाती हैं और मंदिरों में उल्लास और भक्ति का माहौल रहता है। इस प्रकार, चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा और प्रभु श्रीराम की कृपा पाने का अद्भुत अवसर है, जो जीवन में सुख, शांति, शक्ति और समृद्धि लाता है। मगर इस बार चैत्र नवरात्रि में विशेष संयोग बन रहा है। हर साल नवरात्रि 9 दिनों तक मनाई जाती हैं, लेकिन इस साल चैत्र नवरात्रि सिर्फ 8 दिनों तक मनाई जाएगी।
इसका कारण तृतीया तिथि का क्षय होने को माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार द्वितीया और तृतीया तिथि एक ही दिन पड़ रही है ऐसे में द्वितीया तिथि के दिन ही भक्त माता ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा की पूजा करेंगे।
चैत्र नवरात्रि घटस्थापना शुभ मुहूर्त :
30 मार्च 2025 को घटस्थापना करने का सबसे अच्छा समय सुबह 6:13 बजे से 10:21 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक होगा।
आखिर कितने दिनों की है चैत्र नवरात्रि :
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से हो चुकी है और समापन 6 अप्रैल, रविवार को होगा। तिथियों में बदलाव के कारण अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही हैं, जिससे नवरात्रि केवल 8 दिनों की होगी। रामनवमी भी इसी दिन मनाई जाएगी मान्यता है, कि इन 9 दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की श्रद्धा से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
चैत्र नवरात्रि पूजा विधि :
१. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें।
२. एक मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें।
३. कलश पर आम के पत्ते सजाकर उस पर नारियल रखें। माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र को पूजा स्थल पर विराजित करें।
४. मां को अक्षत, सिंदूर, लाल फूल, फल, मिठाई, धूप और दीप अर्पित करें।
५. दुर्गा चालीसा का पाठ करें और मां की आरती करें।
६. मां को सात्विक भोजन का भोग अर्पित करें।
चैत्र नवरात्रि अष्टमी मंत्र :
(१) अष्टमी मंत्र-
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ या
देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
(२) बीज मंत्र-
श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:॥
(३) पूजन मंत्र-
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव-प्रमोद-दा॥
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
चैत्र नवरात्रि नियम -
१. नवरात्रि के समय तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
२. शराब, तंबाकू और मांसाहारी चीजें घर में नहीं लाएं।
३. नाखून, बाल और दाढ़ी काटने से बचें।
४. 9 दिन तक खाने में सरसों और तिल का सेवन नहीं करें।
५. व्रत के दौरान सेंधा नमक का सेवन करें।
६. चमड़े से बनी चीजों का इस्तेमाल नहीं करें।
७. नवरात्रि के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनें।
८. किसी से झूठ और अपशब्द न बोलें।
९. नवरात्रि के समय घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

