भारत में एक अजीब मानसिकता हैं ..। कभी लोग पोर्न स्टार सनीलियोनी का समर्थन करते नजर आयेंगे..तो कभी वही लोग ममता कुलकर्णी के दीक्षा लेने पर ..तंज कसते नजर आते हैं !
सारा ज्ञान... सारी नैतिकता अवसर वादी हो गयी हैं।
तंज कर सकते हैं कि ममता कुलकर्णी दीक्षा क्यु ले रही हैं ? क्या सनातन का ज्ञान है ?? अरे ये तो इसके साथ थी ..उसके साथ थी !! ऐसे डांस किया वैसे डांस किया !
अभी तक ममता कुलकर्णी कैसे थी किसी को परवाह नहीं.. लेकिन अब ममता कुलकर्णी की चिंता सताने लगी !
वैराग्य के महत्व को वही अच्छी तरह से जान सकता हैं..जो भोग से परिचित रहा हो ! ज्ञान का महत्व वही अच्छी तरह से समझ सकता हैं जो अज्ञान से परिचित हो ! प्रकाश क्या महत्व है..वही जान सकता हैं जो अंधकार में रहा ।
आप समझते हैं कि ..आप ममता कुलकर्णी से अधिक नैतिक रहे हैं.. अधिक धार्मिक हैं ..अधिक समझते हैं.. तो आप भी साधू संन्यासी बन जाये ..। बाकी ढोंग क्या है..अपने जीवन को देखे.. सबसे बड़ा ढोंग तब आता है..जब कठ'ल्ला व चादर से डर कर धिम्मी पने के कारण बोलते है कि सभी धर्म अच्छे हैं ! सबसे बड़ा ढोंग तो तब होता हैं जब ..ह' लाला करा कर पाक करने वाले को भी बोलते हो कि आपका दीनी मामला है आपकी इज्जत करते हैं !
कुछ लोगो ने ममता कुलकर्णी की दीक्षा के समय की फोटो शेयर करते हुए लिखा कि दीक्षा लेते समय ..चेहरे पर खुशी नहीं दिख रही !
क्यु आप.. को साधू सन्यासी बनने का बहुत अनुभव है क्या ??
और वैसे भी जो लालसा जैसे सांसारिक कर्म जो जीवन से लिपटे रहे...उन सबका विनाश करके नये कर्म में प्रवेश करने के लिये मन मे जो संघर्ष चल रहा हो उससे आपको चेहरे पर खुशी दिखेगी ?? सांसारिक कर्म आसानी से पीछा नहीं छोड़ते हैं। मन मे संघर्ष रहता हैं जिसका तनाव चेहरे पर दिखेगा ही ! कोई योगी हो कर दीक्षा नहीं लेता ..दीक्षा लेकर योग सीखता है। यदि ये न समझ में आये तो अपना मुंह बंद ही रखना उचित है।

